शशिकला के राजनीतिक भविष्य का फैसला : सुप्रीम कोर्ट में आज फैसला

नई दिल्ली: आय से अधिक संपत्ति के मामले में आज शशिकला पर फैसला आ सकता है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले की रात शशिकला उसी रिसॉर्ट में रुकीं, जहां शशिकला को समर्थन देने वाले विधायकों को ठहराया गया है. शशिकला ने रिसॉर्ट में 120 विधायकों के साथ मुलाकात की, जो करीब एक हफ्ते से यहीं बने हुए हैं. शशिकला ने इनसे कहा कि सब कुछ ठीक दिख रहा है. हम ही आगे सरकार चलाएंगे. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ 21 साल पुराने 66 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने शशिकला और जयललिता को 2015 में बरी कर दिया था. कर्नाटक सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.  शशिकला के राजनीतिक भविष्य का फैसला मंगलवार सुबह 10:30 बजे होगा.

जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस अमिताव राय की बेंच फैसला सुनाएगी. दोनों जज अलग-अलग फैसला सुनाएंगे. अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले को बरकरार रखता है, तो शशिकला के मुख्यमंत्री बनने की राह में कोई नई मुश्किल नहीं खड़ी होगी, लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट शशिकला को दोषी करार देता है तो वो मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगी और जेल भी जा सकती हैं.

गौरतलब है कि ओ. पन्नीरसेल्वम के बागी रुख अख्तियार करने के बाद शशिकला ने तमिलनाडु के गवर्नर सी विद्यासागर राव से निवेदन किया है कि वह जल्द से जल्द सीएम पद की कमान उनके हाथों में थमा दें. सोमवार को चेन्नई में समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए शशिकला ने कहा, हमने पन्नीरसेल्वम जैसे हजारों देखे हैं. मैं डरती नहीं हूं.

1991-1996 के बीच जयललिता के मुख्यमंत्री रहते समय आय से अधिक 66 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने के मामले में  सितंबर 2014 में बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट ने जयललिता, शशिकला और उनके दो रिश्तेदारों को चार साल की सजा और 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. इस मामले में शशिशकला को उकसाने और साजिश रचने का दोषी करार दिया गया था. लेकिन मई, 2015 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने जयललिता और शशिकला समेत सभी को बरी कर दिया था.

इसके बाद कर्नाटक सरकार, डीएमके और सुब्रमण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने चार महीने की सुनवाई के बाद पिछले साल जून में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक सरकार की दलील थी कि हाईकोर्ट का फैसला गलत है और हाईकोर्ट ने बरी करने के फैसले में मैथमैटिकल एरर किया है. सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट के फैसले को पलटना चाहिए ताकि ये संदेश जाए कि जनप्रतिनिधि होकर भ्रष्टाचार करने पर कड़ी सजा मिल सकती है.

क्या हो सकता है?
1. अगर दोनों जजों की Conviction यानी दोष सिद्धी को लेकर राय अलग-अलग तो मामले को तीन जजों की बेंच में भेजा जाएगा. लेकिन ये शशिकला के लिए बड़ी राहत होगी, क्योंकि फिर कर्नाटक हाईकोर्ट का बरी करने का फैसला ही लागू रहेगा.

2. अगर दोनों जज एक राय से इस केस में शशिकला को दोषी करार देते हैं और सजा पर दोनों की राय अलग-अलग हो तो शशिकला को बड़ा झटका लगेगा. वो न तो मुख्यमंत्री बन पाएंगी, न ही चुनाव लड़ पाएंगी. हालांकि वो जेल नहीं जाएंगी, क्योंकि मामले में कितनी सजा दी जाए, ये तीन जजों की बेंच को भेजा जाएगा.

3. हो सकता है कि दोनों जजों की दोष सिद्धी और सजा देने में सहमति हो और आय से अधिक संपत्ति को जब्त करने को लेकर राय अलग हो, तो शशिकला न तो मुख्यमंत्री बन पाएंगी, न चुनाव लड़ पाएंगी और साथ ही उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है. सजा पूरी होने से 6 साल तक वो चुनाव नहीं लड़ पाएंगी. ट्रायल कोर्ट ने राज्य सरकार को संपत्ति को जब्त करने के आदेश दिए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने सभी को बरी कर दिया था.

4.  हो सकता है कि दोनों जज इस मामले को फिर से सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दें और ट्रायल कोर्ट के सजा के आदेश को स्टे ना करें तो शशिकला मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगी.

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