बच्चे ने भरण पोषण के नाम पर मांगा पिता का प्यार, कोर्ट ने कहा संभव नहीं

जयपुर। राजस्थान में एक 10 साल के एक बच्चे ने भरण पोषण के रूप में पिता के साथ रोजाना आठ घंटे बिताने और लाड प्यार की मांग की, लेकिन कोर्ट को यह कहते हुए याचिका खारिज करनी पड़ी कि मौजूदा कानून में यह सम्भव नहीं है।

हालांकि कोर्ट ने सरकार से कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता इस संबंध में दंड प्रक्रिया सहिता की धारा 125 में संशोधन के लिए उचित कदम उठाए।

दरअसल एक 10 साल के बच्चे सत्यम की अर्जी को अधीनस्थ अदालत ने खारिज कर दिया था। इस पर इस आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट में बच्चे की मां ने पक्ष रखा कि बच्चे को भरण पोषण में पिता का प्यार और साथ चाहिए।

राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस दीपक माहेश्वरी की खंडपीठ ने इस अपील को ठुकरा दिया और निचली अदालत के आदेश को सही माना।

बच्चे की मां राजकुमारी और पिता मनोज का विवाह 2005 में हुआ था, लेकिन पति मनोज ने जयपुर के पारिवारिक न्यायालय में कई कारण बताते हुए विवाह विच्छेद के लिए केस दायर किया। अदालत ने केस का फैसला करते हुए दोनों का विवाह विच्छेद मंजूर कर लिया था। इसके बाद यह पूरा मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।

इस मामले की सुनवाई करते हुई हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद या मनमुटाव के कारण वैवाहिक विवाद भले ही पैदा हों। लेकिन इसकी प्रत्यक्ष हानि बच्चों को झेलनी पड़ती है। और ऐसे विवादों में मासूम बच्चों की कोई भूमिका नहीं होती है। अदालत ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि बच्चों की देखभाल और समुचित विकास के लिए उसे माता-पिता दोनों का साथ चाहिए और यह प्राप्त करना उनका नैसर्गिक अधिकार है।

अदालत ने बच्चे की भावना को समझा और कहा कि अवयस्क बेटे को पिता के प्यार का पूरा अधिकार है। लेकिन सीआरपीसी की धारा 125 में बेटे को उसके पिता का साथ और प्यार दिलवाने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बच्चे ने जो मांगा है वो मौजूदा कानून में दिलाना संभव नहीं हैं। कोर्ट ने अर्जी को खारिज कर दिया।

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