एयरसेल-मैक्सिस मामले में मारन बंधुओं को आरोपमुक्त करने के कोर्ट के आदेश पर स्टे नहीं

नई दिल्ली। एयरसेल-मैक्सिस मामले में मारन बंधुओं को आरोपमुक्त करने के खिलाफ ईडी की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि आप बताइए कि कैसे हाईकोर्ट को बाईपास कर निचली अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है । कोर्ट ने विशेष लोक अभियोजक आनंद ग्रोवर को इस सवाल का जवाब देने के लिए बुधवार तक का समय दिया । ईडी ने निचली कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। ईडी का तर्क था कि सीबीआई कोर्ट ने प्रक्रिया का ठीक से पालन नहीं किया इसलिए बॉन्ड लेकर मारन बंधुओं को छोड़ने के फैसले पर रोक लगनी चाहिए।

ईडी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। इसमें ये तर्क दिया गया कि मारन बंधुओं को रिहाई के लिए बेल बॉन्ड भरने को भी नहीं कहा गया। इसके अलावा मारन बंधुओं की जब्त की गई संपत्ति को भी वापस देने का आदेश दिया गया जो कि कानूनसम्मत नहीं है। ईडी ने मांग की है कि स्पेशल 2जी कोर्ट को निर्देश दिए जाएं कि मारन बंधुओं की रिहाई के बाद बेल बॉन्ड लेने से रोका जाए जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना। आपको बता दें कि स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दो फरवरी को दयानिधि मारन, उनके भाई कलानिधि मारन, कलानिधि मारन की पत्नी कावेरी कलानिधि, साऊथ एशिया एफएम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के षणमुगम और दो कंपनियों को आरोपमुक्त किया । ये यूपीए वन के समय 2004 से 2007 के दौरान संचार मंत्री रहे दयानिधि मारन द्वारा की गई गड़बड़ियों से संबंधित मामला है ।

मारन पर आरोप है कि उन्होंने एयरसेल लिमिटेड को जरूरी मंजूरी देने में जानबूझकर देरी की और इसके पूर्व मालिक सी शिवाशंकरन को जबरन अपनी कंपनी मलेशिया की मैक्सिस कंपनी कम्युनिकेशन को बेचने का दबाव डाला । इसके बदले में कृष्णन के ग्रुप वाली कंपनी ने मारन के भाई कलानिधि मारन की कंपनी सन ग्रुप में करीब सवा छह सौ करोड़ रुपये का निवेश किया ।

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