राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा को लग सकता है झटका, एक और सहयोगी दल ने दिखाए बगावती तेवर

उत्तर प्रदेश और बिहार उपचुनाव में भाजपा को करारा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश में तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भाजपा को चारों खाने चित्त कर दिया तो वहीं बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने खेल बिगाड़ दिया। इस हार के बाद भाजपा आगामी 23 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव में परचम लहराने की फिराक में है लेकिन चुनाव से पहले ही भाजपा को झटका लग सकता है।

दरअसल, बीते साल भाजपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के चार विधायक आगामी राज्यसभा चुनाव में भाजपा का खेल बिगाड़ सकते हैं। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में भाजपा ने अपने 9 उम्मीदवार खड़े किए हैं जिसमें से 8 पर पार्टी आश्वत है। वहीं 2 सीटों पर सपा-बसपा जीत के लिए आश्वत हैं। जिस 9वें कैंडिडेट को पार्टी ने खड़ा किया है उसकी जीत और हार अब सुभासपा के विधायकों के मतों से तय होगी।

हालांकि 9वीं सीट पर सुभासपा भाजपा को समर्थन करेगी या नहीं इस पर पार्टी ने अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं। योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा ‘हम अभी यह कैसे फाइनल कर सकते हैं कि हम राज्यसभा चुनावों में भाजपा को समर्थन करेंगे या फिर किसी अन्य दल को। हमें अभी इसपर अंतिम फैसला लेना है।’

उन्होंने भाजपा पर नारजगी जाहिर करते हुए कहा ‘हम अभी भी भाजपा के साथ गठबंधन में है लेकिन उन्होंने एक बार भी फूलपुर और गोरखपुर में उम्मीदवार खड़ा करने से पहले हमसे मशविरा नहीं लिया और न ही चुनाव में हमारी भूमिका के बार में कोई बात की।’

बता दें कि राज्यसभा के लिए 23 मार्च को चुनाव होने हैं। नौंवे प्रत्याशी के रूप में भाजपा ने अनिल अग्रवाल को उतारा है।

राज्य विधानसभा की दलगत स्थिति
403 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा के 311, अपना दल (एस) के 09, एसबीएसपी के 04 विधायक हैं। इस तरह से सत्तापक्ष के पास कुल 324 विधायकों हैं। वहीं विपक्ष के खेमे में समाजवादी पार्टी के 47, बसपा के 19, कांग्रेस के 07, राष्ट्रीय लोकदल का एक, निषाद पार्टी का एक और  तीन निर्दलीय विधायक हैं। यही विधायक राज्यसभा की रिक्त हुई 10 सीटों के लिए नये सदस्यों का चुनाव करेंगे।

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